ET (ऑफ़सेट) क्या है?
ET रिम की माउंटिंग सतह और उसकी सेंटरलाइन के बीच की दूरी है, मिलीमीटर में। ज़्यादा ET रिम को अंदर खींचता है, कम ET उसे बाहर धकेलता है। अगर सिर्फ़ ET बदले, तो रिम उतने ही अंतर से खिसकता है: ET45 से ET38 पर जाने से रिम 7 mm बाहर आता है।
जब चौड़ाई भी बदले
चौड़ाई के अंतर का आधा हिस्सा हर तरफ़ जुड़ता है (1 इंच = 25.4 mm):
- अंदर का किनारा = (नई चौड़ाई − पुरानी चौड़ाई) ÷ 2 + (नया ET − पुराना ET)
- बाहर का किनारा = (नई चौड़ाई − पुरानी चौड़ाई) ÷ 2 − (नया ET − पुराना ET)
पॉज़िटिव मान का मतलब है कि वह किनारा अपनी तरफ़ खिसकता है: अंदर का किनारा स्ट्रट की ओर, बाहर का किनारा आर्च की ओर।
कितना ठीक है?
यह हर कार की क्लीयरेंस पर निर्भर करता है। ज़्यादातर कारों में फ़ैक्ट्री ET से ±5 mm के भीतर रहना ठीक है। अगर बाहर का किनारा 10 mm से ज़्यादा बाहर आए, तो ध्यान से जाँच ज़रूरी है। बोल्ट पैटर्न (PCD) और सेंटर बोर भी कार से मेल खाने चाहिए।